यंत्र इंडिया को मिनीरत्न-I दर्जा

Mon 02-Feb-2026,06:16 PM IST +05:30

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यंत्र इंडिया को मिनीरत्न-I दर्जा Yil-Miniratna-I-Status-Defense
  • यंत्र इंडिया लिमिटेड को मिनीरत्न-I दर्जा, 500 करोड़ तक पूंजीगत व्यय स्वतंत्र निर्णय का अधिकार मिला।

  • मिनीरत्न-I दर्जा आत्मनिर्भर भारत, रक्षा उत्पादन और स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण कदम।

Delhi / West Delhi :

Delhi/ रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) को मिनीरत्न (श्रेणी-I) का दर्जा देने की मंजूरी दी। केवल चार वर्षों में सरकारी संगठन से लाभ कमाने वाली कंपनी में परिणत होने पर मंत्री ने कंपनी प्रबंधन की उपलब्धियों की सराहना की। मिनीरत्न-I दर्जा मिलने से यंत्र इंडिया को अधिक स्वायत्तता प्राप्त होगी, जिसके तहत 500 करोड़ रुपये तक पूंजीगत व्यय का निर्णय बोर्ड की स्वीकृति से किया जा सकेगा। यह कदम आत्मनिर्भर भारत और रक्षा उत्पादन में स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।
वाईआईएल ने स्थापना के बाद से रक्षा उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय प्रगति की है। वित्त वर्ष 2021-22 की दूसरी छमाही में कंपनी ने 956.32 करोड़ रुपये की बिक्री की थी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 3,108.79 करोड़ रुपये हो गई। निर्यात में भी कंपनी ने शून्य से 321.77 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की है।

कंपनी के प्रमुख उत्पादों में कार्बन फाइबर कंपोजिट, मध्यम और बड़े कैलिबर गोला-बारूद के लिए असेंबली उत्पाद, बख्तरबंद वाहनों और मुख्य युद्धक टैंकों (MBT) के लिए असेंबली उत्पाद, ग्लास कंपोजिट और एल्युमीनियम मिश्र धातु शामिल हैं। मिनीरत्न-I दर्जा मिलने से कंपनी अब नए प्रोजेक्ट्स, उपकरण खरीद और आधुनिकीकरण पर 500 करोड़ रुपये तक का पूंजीगत व्यय स्वतंत्र रूप से कर सकती है।

इससे यंत्र इंडिया को रक्षा उत्पादन और निर्यात में तेज़ी से विकास करने में मदद मिलेगी। रक्षा उत्पादन क्षेत्र में नवाचार और दक्षता बढ़ाने के लिए सरकार ने पूर्व आयुध कारखाना बोर्ड के निगमीकरण के बाद सात नए डीपीएसयू स्थापित किए। यंत्र इंडिया, ये सात डीपीएसयू में से एक है और यह रक्षा उत्पादन विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है।

मिनीरत्न-I दर्जा देने का यह निर्णय आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को सुदृढ़ करता है। इसका उद्देश्य रक्षा आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना, और भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।